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Friday, May 29, 2015

मति चार प्रकार की




मति चार प्रकार की होती है। सुमति, कुमति, दुर्मती और महामति। मेरा फायदा हो या न हो, दुसरे का अवश्य होना चाहिए, यह सुमति है। मेरा फायदा न हो तो दुसरे का भी न हो, यह कुमति है। मेरा कोई लाभ नहीं परन्तु दुसरे का नुक्सान अवश्य होना चाहिए , यह दुर्मती है। और महामति होती है की मेरा भले ही नुकसान हो किन्तु दुसरे का फायदा अवश्य होना चाहिए यह देवताओं की मति है। 
परम पूज्य श्री सुधान्शुजी महाराज 

Thursday, May 28, 2015

भगवान ने सबको







संसार के आकाश में सूर्य को आदर्श मान कर चलो यह संसार तो आकाश  की तरह है। जैसे आकाश में कोई पक्षी उड़ता है, उसका कोई पथ नहीं होता- खुला आकाश सबके सामने पड़ा हुआ है उसी तरह भगवान ने सबको स्वतंत्रता दी है। अपनी मंजिल और अपना रास्ता आपको तय करना है। आप कहां-से-कहां जाना चाहते है, यह आपको सोचना है। खुले आसमान में कोई निशान नहीं लगाये गये हैं, जिनसे आपको रास्ता पता लगे। आकाश में कहीं सड़के नहीं हैं । पक्षी उड़ता है तो उसे स्वंय अपने मार्ग का निर्धारण करना पड़ता है। तुम्हारे सामने तुम्हारा रास्ता खुला पड़ा है। अपनी बुद्धि से, अपने ह्रदय की संवेदनाओं से अपना मार्ग चुनो।

प्रभु के नाम के

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परम पूज्य सुधांशुजी महाराज



प्रभु के नाम के संकीर्तन और भजन की महिमा महान है, अपरम्पार होती है। उसकी मस्ती को शब्दों में व्यक्त कर पाना नामुमकिन है। 

Wednesday, May 27, 2015

बहुत पछताओगे

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परम पूज्य सुधांशुजी महाराज


"प्रभु के भरोसे हांको गाडी, जब लुट जाएगी श्वासों की पूँजी, बहुत पछताओगे अनाड़ी"